Wednesday, 15 August, 2007

गोमूत्र के मिलेंगे चोखे दाम



खबर आई है...

देहरादून : उत्‍तराखंड की भाजपा सरकार अब गोमूत्र के औषधीय उपयोग पर विशेष ध्‍यान केन्द्रित करने जा रही है. सहकारिता के आधार पर गायों को विशेष संरक्षण देने की योजना है. मौजूदा समय में औषधि निर्माता पंतनगर कृषि विश्‍वविद्यालय से 4 रुपये प्रति लीटर गोमूत्र खरीद रहे हैं, जबकि बाबा रामदेव ने 6 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदने का प्रस्‍ताव किया है. बताया जाता है कि वर्तमान में गोमूत्र में 24 औषधीय गुण होते हैं और 136 औषधियों में इसका उपयोग हो रहा है. बरेली स्थित आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. चौहान की रिसर्च के मुताबिक लाल रंग की गाय के दूध और मूत्र में कैंसरनाशक तत्‍व मौजूद हैं. उत्‍तराखंड के पशुपालन मंत्री त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत का कहना है कि लाल रंग की गाय को बद्री गाय का नाम दिया गया है. शीघ्र ही प्रदेश के सभी 13 जिलों में बद्री गाय की खोज का अभियान चलाया जाएगा.
हिन्‍दी दैनिक हिन्‍दुस्‍तान के दिल्‍ली संस्‍करण में मंगलवार 14 अगस्‍त को प्रकाशित.

छिद्रान्‍वेषण...

इसे सही कहें या गलत. दोनों ही शायद जल्‍दबाजी होगी. गोमूत्र में औषधीय गुण होते हैं, ये न तो भाजपा को आज ही मालूम हुआ होगा, न बाबा रामदेव को और न ही आईवीआरआई के वैज्ञानिकों को. फिर अचानक भाजपा को ऐसी बुद्धि कहां से आ गई. खैर देर आयद, दुरुस्‍त आयद.

दरअसल यहां पर शातिर अक्‍ल भाजपा की नहीं बाबा रामदेव की काम कर रही है. बिजनेस चमकाने का नया फंडा उनकी करामाती खोपड़ी में समा गया है. फिर अगर सत्‍ता में भाजपा बैठी हो तो कहने ही क्‍या. वरना ठेका संस्‍कृति की प्रबल समर्थक भगवा खेमे के मूढ़ मगज में सहकारिता के आधार पर कोई काम करने का विचार आना उसी तरह आश्‍चर्यजनक है, ज्‍यों दिन में चांद दिखाई देना. दिन में चांद इसलिए लिखा गया है, क्‍योंकि वह यदि कभी-कभार धुंधला सा दिखाई भी दे तो उसके पीछे कोई खास कारण जरूर होता है. पंतनगर कृषि विवि या बरेली स्थित आईवीआरआई के शोधों को लेकर कोई संदेह करना ठीक नहीं होगा, मगर इसकी कोई गारंटी नहीं दे सकता कि वहां मौजूद लोगों ने अंदर से एक भगवा हाफ पैंट न पहनी होगी.
बात करें कि ठेका पद्धति यानी कांट्रेक्‍ट सिस्‍टम की अगुआ भाजपा की उत्‍तराखंड सरकार ने सहकारिता योजना कैसे अपना ली. पहला तो यह कि बाबा रामदेव भाजपा के शीर्षस्‍थ नेताओं से विमर्श करते हैं और अपनी योजनाएं लागू करवाते हैं. दूसरा यह कि गोमूत्र ठेके पर एकत्र करना लगभग असंभव होगा. इसके लिए कोई अलार्म नहीं लगाया जा सकता कि गाय तयशुदा समय पर ही उसका उत्‍सर्जन करे. लिहाजा मजबूरी में भाजपा को सहकारिता को स्‍वीकार करना पड़ा है. तीसरी बात यह योजना भाजपा द्वारा सदियों से अलापे जा रहे गोसंरक्षण के राग से ही सुर मिलाती है. वैसे यह भी आश्‍चर्यजनक है कि सिर्फ लाल रंग की ही गाय भाजपा की कार्यसूची में दर्ज हुई है. और हां बद्री गाय नाम उत्‍तराखंड के भाजपाई पशुपालन मंत्री त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत की देन है. भाजपा को यह नाम पेटेंट करा लेना चाहिए.
उत्‍तराखंड में करीब चार साल पहले 2003 में हुई पशुगणना के मुताबिक पूरे प्रदेश में कुल 11 लाख देशी गाय हैं. इसके अलावा क्रास ब्रीड गाय 1 लाख 77 हजार, 855 आंकी गई हैं. औसतन एक गाय प्रतिदिन पांच लीटर मूत्र का उत्‍सर्जन करती है. सो भाजपा का मानना है कि पूरे प्रदेश में प्रतिदिन 52 लाख लीटर गोमूत्र का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है.

शायद भाजपा व रामदेव का दुख जायज है कि प्रदेश में अब तक सदियों से बेहिसाब गोमूत्र बर्बाद हो गया. हमारी संवेदनाएं.

3 खबर का असर:

Nishikant Tiwari said...

दिल की कलम से
नाम आसमान पर लिख देंगे कसम से
गिराएंगे मिलकर बिजलियाँ
लिख लेख कविता कहानियाँ
हिन्दी छा जाए ऐसे
दुनियावाले दबालें दाँतो तले उगलियाँ ।
NishikantWorld

deepanjali said...

आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

चन्दन said...

मुर्ख हमेसा बिना सोचे समझे लिखता है वहि तुम कर रहे हो

ना काहू से दोस्‍ती, ना काहू से बैर

अपन को तो खबर से मतलब है. कहीं से भी आए, मगर उसमें गूदा होना चाहिए.