Friday, 20 July, 2007

कृपालुजी महाराज को बधाई

खबर आई है...

त्रिनिडाड : बलात्कार और यौन शोषण के आरोपों से घिरे हिन्दू धर्म प्रचारक श्रीकृपालुजी महाराज को त्रिनिडाड की एक अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. स्थानीय अदालत ने 16 जुलाई को अपने एक फैसले में कहा है कि अभियोजन उनके खिलाफ अपने आरोप साबित नहीं कर पाया है. 85 वर्षीय कृपालु महाराज के दोषमुक्त होने पर उनके कैरेबियाई मेजबान जॉन गोविंद समेत भारतीय मूल के लोगों ने खुशी जाहिर की है. त्रिनिडाड की 45 फीसदी आबादी के पुरखे भारत के विभिन्न प्रांतों से आकर बसे थे.

त्रिनिडाड की एक न्यूज पोर्टल पर जारी समाचार.


छिद्रान्वेषण...

कृपालुजी महाराज ने पूर्व में अपने एक प्रवचन में कहा था- हर आदमी के मन में चोर होता है. जो उसे दबा लेता है वह साधु है. जो नहीं दबा पाता वह साधारण मनुष्य है.
सच भी है- चोरी करने वाला चोर नहीं माना जाता. जिसकी चोरी साबित हो जाती है, वही चोर होता है.
कृपालुजी महाराज को त्रिनिडाड की स्थानीय अदालत द्वारा साक्ष्यों के अभाव में बलात्कार और यौन शोषण के आरोपों से दोषमुक्त किया गया है. अदालत का मानना है कि इतने बड़े पब्लिक फिगर से जुड़े मामले को ज्यादा समय तक लटकाया नहीं जा सकता. अभियोजन पक्ष को अल्प समय में उपयुक्त सबूत पेश करने को कहा गया. ऐसा न हो पाने की स्थिति में कृपालुजी दोषमुक्त करार दिए गए.
वैसे उनकी उम्र को देखते हुए उन पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं. मगर पाखंड किसी भी आवरण में छिपा हो उसका निश्चित ही विरोध किया जाना चाहिए.
यहां बता दें कि कृपालु महाराज कुछ हिन्दू संगठनों के निमंत्रण पर मई माह में त्रिनिडाड गए थे. इसी दौरान ग्याना मूल की एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि महाराज ने प्रार्थना कक्ष में उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद 20 मई को पुलिस ने कृपालुजी को गिरफ्तार कर उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया था. हालांकि बाद में उनको जमानत पर रिहा कर दिया गया था. उनके विश्वव्यापी धार्मिक भ्रमण अभियान के कारण पासपोर्ट भी बहाल कर दिया गया था.

4 खबर का असर:

परमजीत बाली said...

सही बात है पाखंड का विरोध होना ही चहिए।चाहे वह कोई भी करे।

Shrish said...

वहाँ की अदालत ने उन्हें तसल्ली करके ही रिहा किया होगा अतः वे निर्दोष ही लगते हैं। वैसे देखा गया है कि कुछ हिन्दू गुरुओं को नापसंद करने वाले लोग उन्हें बदनाम करने हेतु भी इस तरह के प्रपंच रचते हैं।

Gyandutt Pandey said...
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Gyandutt Pandey said...

खबर, खबर है - उसे वैसे ही लिया जाये! कौन क्या है, वही जाने.

ना काहू से दोस्‍ती, ना काहू से बैर

अपन को तो खबर से मतलब है. कहीं से भी आए, मगर उसमें गूदा होना चाहिए.