राज ठाकरे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
खबर आई है...
जमशेदपुर : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. राज पर दो माह पहले बिहारी समाज के विरुद्ध बयान देने का आरोप है. कोर्ट में उपस्थित न होने पर यह वारंट जारी किया गया है. राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य और वकील सुधीर कुमार पप्पू ने दायर याचिका में कहा था कि राज ठाकरे का बयान आपत्तिजनक है.
अमर उजाला के आगरा संस्करण में आज गुरुवार को प्रकाशित.
छिद्रान्वेषण...
इन दिनों हर तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस चल रही है. .... एमएफ हुसैन, चन्द्रमोहन, नामवर सिंह, राजकिशोर......बहुत लंबी सूची हो सकती है. क्यों न इसमें राज ठाकरे को भी शामिल कर ही लें. अब आप तमाम तर्क गिनाने लगेंगे, गिनाते रहें. यहां उनको भी इनकी श्रेणी में रख दिया गया है या यूं कहें कि इनको भी उनकी श्रेणी में रखा है. जब हुसैन भारत माता को और चन्द्रमोहन दुर्गा व ईसा को नंगा पेश कर सकते हैं, नामवर सिंह जी सुमित्रानंदन पंत व तुलसीदास को और राजकिशोर जी मैथिलीशरण गुप्त व राजेन्द्र यादव आदि-आदि को कूड़ा घोषित कर सकते हैं तो राज ठाकरे क्यों अपने विचारों को जाहिर नहीं कर सकते.
यह जानना दिलचस्प होगा कि सब पर लगभग समान धाराओं के तहत न्यायिक प्रक्रिया चल रही है. सब समाज में जाने-अनजाने द्वेष फैला रहे हैं. तो क्यों राज ठाकरे और दन स्वनामधन्य विभूतियों की सूची अलग से बनाई जाय.
क्या कूड़े के ठेकेदार तय करेंगे कि किसे सूची में शामिल किया जाना है.



3 खबर का असर:
विशेष भाई, इन को कूड़ा बीननें दो।इन्हे सिर्फ सवाल उठाने आते हैं।"राज ठाकरे क्यों अपने विचारों को जाहिर नहीं कर सकते." इस का उत्तर ये नही देगें।
@ काकेश
आपके दोनों ब्लौग देखे हुए
हैं...
उत्तराखंड के अन्य ब्लौगर : काकेश , श्रीश जी , तरुण जी , घुघुति वासुती..
पंकजभाई, सही कहा ।
युपी, बिहार का पौलिटीक्स तो हम सब जानते है। लालू ने अपने राज्य की जनता के लिये कुछ नही किया है। मायावती और मुलायम ने हमेशा जात के नाम पर समाज को बांटा है।
अगर आज युपी और बिहार भी बाकी देश की तरह प्रगतीशील होते तो वहां के लोग मुंबई क्यो भागते? रोज की रोजी रोटी के लिये उन्हे अपने घर छोड कर मुंबई मे फुटपाथ पर क्यों रहना पडता है।
इन नेताओं को पहले ये समझ लेना चाहीये।
बिहारीयोंकी छबी सारे देशवासीयोंकी मन मे ऎसी ही है।
सही बात है राज ठाकरे को अपने राज्य से लगाव क्यो नही होगा? बाहर से आनेवाले लोग उनके राज्य मे जाकर उनकी भाषा का सम्मान नही करेंगे तो कैसे चलेगा।
अमित
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