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बाबा रामदेव, मुझे क्षमा करें.

खबर आई है...
नई दिल्‍ली : योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा बेटा पैदा करने की दवा बेचने के मामले में केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने उत्‍तराखंड सरकार को नोटिस भेजा है. नोटिस में दिव्‍य योग फार्मेसी की कई दवाओं पर शक जाहिर करते हुए जांच के निर्देश दिए गए है.
दैनिक जागरण, अलीगढ़ में आज 30 अप्रैल को पहले पेज पर.

छिद्रान्‍वेषण...
लगता है प्रात: स्‍मरणीय बाबा रामदेव से लोग दुश्‍मनी मान बैठे हैं. गाहे-ब-गाहे लोग डिटरजेंट से हाथ धोकर उनके पीछे पड़ जाते हैं. पहले बाबा बोले- निरोगी रहोगे, लोग सरपट दौड़े योग के लिए. फिर बाबा बोले- बिमारियां दूर होंगी, लोग फिर दौड़े. बाबा बोलते रहे, लोग... रामदेव शरणं गच्‍छामि.
कुछ अरसे बाद बाबा फिर बोले- कैंसर ठीक होगा, जनता जनार्दन फिर दौड़ी. बाबा बोले एड़स ठीक होगा. कुछ लोग ठिठके, कुछ फिर भी दौड़े. बाबा के भगवे में विज्ञान अदृश्‍य हो गया. वैज्ञानिक बेवकूफ हैं, यह साबित कर दिखाया स्‍तुत्‍य बाबा रामदेव ने. बाबा का दवाखाना चल निकला. अब बाबा लड़के पैदा करने का नया कामसूत्र लेकर आए हैं. ऐसी दवा का दावा कि शर्तिया लड़का ही जनेगी भारतीय नारी.
मैं भविष्‍य का दृश्‍य सोच रहा हूं. लड़के ही लड़के. चारों ओर लड़के. बस लड़के. आहा.... मगर ओह भी तो... जब हर तरफ लड़के ही लड़के होंगे तो. सब योगा में जुटे होंगे. अद्भुत परिदृश्‍य है.
सवाल यह है कि बाबा साबित क्‍या करना चाहते हैं. क्‍या वे सर्वशक्तिमान हैं. अंधभक्ति इस देश का दुर्भाग्‍य है.
वैसे बाबा रामदेव ने वाकई वह कर दिखाया जो पतंजलि नहीं कर पाए. योगा की सटीक मार्केटिंग. योगा के स्‍टाल पर दिव्‍य योग फार्मेसी की दवा. लोग मुग्‍ध होकर फांके जा रहे हैं बाबा रामदेव के नाम की पुडि़या.
बाबा बढि़या मार्केटिंग गुरु हैं. लालू से भी बढि़या.... दि ग्रेट बाबा रामदेव, मुझ नादान को क्षमा करें.

10 comments:

Sanjeet Tripathi said...

मुझे लगता है कि बाबा योग से ज्यादा मनोविग्यान के जानकार है, क्योंकि पहली बात तो यह कि हम भारतीय अपनी प्राचीन सिरमौर होने की बात से आज तक उबर नही पाते, और बाबा रामदेव इसी बात को सबसे ज्यादा भुनाते आ रहे हैं।
दुसरी बात यह कि भारतीय परंपरा और मानसिकता में बेटों का क्या स्थान है यह हम सभी जानते है तो शर्तिया बेटा पैदा करने वाली दवा बेचना कितना आसान है यह समझने वाली बात है, अब अगर इस दवा को खाने के बाद भी बेटी ही पैदा हो तो यह कह कर बचा जा सकता है ना कि भाई इस दवा के साथ कुछ परहेज़ भी आवश्यक बताए गए थे, निश्चित ही वह परहेज़ नही किए गए होंगे।
मीडिया से विशेष निवेदन:-कृपया भारत के मार्केटिंग गुरुओं मे बाबा रामदेव का नाम भी शुमार किया जाए

Rati said...

दवा का तो पता नहीं, किन्तु प्राचीन काल से ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार निश्चित तिथि, मुहूर्त में बीजारोपण किया जाए तो इच्छानुसार पुत्र या पुत्री प्राप्त कर सकते हैं। हाल ही में कई लोग परीक्षा करके देख चुके हैं। कुछ प्राचीन वैदिक प्रतिख्यानों में गर्भधारण के तीसरे महीने में किए जाने वाले कुछ संस्कारों का पूजा-विधियों का भी वर्णन है, जिससे गर्भस्थ शिशु के लिंग को बदला जा सकता है।

dhurvirodhi said...

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय मतलब उसी संस्था ने जिसने पहले बाबा पर मानव हड्डी के बारे में आरोप लगाये थे, और फिर दुबक गये थे.

शायद बेटा पैदा करने की खबर सिर्फ़ एनडीटीवी की मालकिन की बहिन वृन्दा करात ने सुनी होगी.

अरुण said...

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय मतलब उसी संस्था ने जिसने पहले बाबा पर मानव हड्डी के बारे में आरोप लगाये थे, और फिर दुबक गये थे.

शायद बेटा पैदा करने की खबर सिर्फ़ एनडीटीवी की मालकिन की बहिन वृन्दा करात ने सुनी होगी.

सत्य उवाच

notepad said...
This comment has been removed by the author.
notepad said...

हम तो पहले सेही कह रहे हैं के बाबा मार्केटिंग गुरु हैं
:)

HARI PRAKASH said...

लड़का होने की दवा का प्रचार बाबा ने कब किया हमें नहीं पता। लेकिन आयुर्वेद में इस प्रकार के प्रयोग हैं, जो प्रभावी भी हैं। जहाँ तक इन प्रयोगों के शर्तिया प्रभावी होने का प्रश्न है तो किसी भी चिकित्सा प्रणाली में किसी भी रोग के उपचार के शत प्रतिशत सफल होने का दावा कोई भी नहीं कर सकता। उपचार के सफल न होने के अनेक कारण हो सकते हैं। सबसे अधिक असफलताएं तो एलोपैथी के ही नाम हैं लेकिन विज्ञान शब्द के दुरूपयोग के कारण जनसाधारण इतना भ्रमित है कि एलोपैथी के अवगुणों पर ध्यान ही नहीं दिया जाता और अन्य प्रणालियों की कुतर्कपूर्ण आलोचना करके अपने आप को विद्वान समझने के आनन्द में लोग मग्न रहते हैं। एलोपैथी में कैंसर के विशेषज्ञों को कैंसर से ही मरते देखा गया है, इस विषय में आप क्या कहेंगे, क्या कह कर बचेंगे।
समाज के सुचारु संचालन हेतु लड़का व लड़की दोनो ही आवश्यक हैं। जैसाकि आजकल कहने का फैशन चल रहा है कि लड़का न भी हो तो क्या फ़र्क पड़ता है तो केवल लड़कियां क्या लड़कियों से विवाह करके दुनिया चला पाएंगीं। संतुलन हर विषय में आवश्यक है। जहां आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके लड़कियों का जन्म रोकना घोर अनुचित कर्म है वहीं आवश्यकतानुसार लड़का पैदा करने के इलाजों पर उंगली उठाना भी उतना ही अनुचित है। बेटों का जन्म केवल परंपरा व मानसिकता ही नही है आवश्यकता भी है।

रामदेव मनोविज्ञान के विशेषज्ञ हों या मार्केटिंग गुरू क्या फ़र्क पड़ता है, किसी का शारीरिक, मानसिक, नैतिक अहित तो नहीं कर रहे और ना ही ऐसा करने की शिक्षा दे रहे हैं। अपनी योग्यता से यदि किसी का अहित किए बिना धन अर्जित कर रहे हैं तो किसी को इससे तकलीफ़ क्यों हो रही है।

Anonymous said...

harish, main tumse sahmat hoon. mujhe samajh nahin ata ki kuch log ramdev ko manovigyani, marketing guru kahkar apni pith thapthapane me kyon mashgool hain. akhir ramdev ne kisi ka bigara kya hai. wo to logo ko yog aur pranayam ki shakti ke baare me bata kar logon ka bhala hi to kar rahe hai.
ye log jinhen baba se taklif hai, jaroor kisi multinational company ke dalaal honge, ye apne swarth ke liye aisa kar rahe hain.

Chasta said...

भाई श्री संजीत, नोतेपद जी मैं श्री हरी प्रकाश जी से पूर्णतया सहमत हूं क्‍या आप ऐसे लोगों से खुश है जो आपको ऐलोपैथी दवाओं को डॉक्‍टर, वैज्ञानिकों को अपनी ओर मिला कर अच्‍छी प्रमाणित करवा कर कई सौ गुना में बेच कर हजारों लोगों को लूट रहे है. कितने ही व्‍यक्ति दवा चुकाने की स्थिति में नहीं होते है. फिर भी "मरता क्‍या नहीं करता" अपना सबकुछ बेचकर वो दवाओं को सेवन करता है. फिर भी कभी कभी हाथ कुछ नहीं लगता है.
और आजकल भारत में बाजारों सामग्री उपलब्‍ध है. उसमें नकली, मिलावट व हानिकारक तत्‍वों से कितनी भरपूर है? यह सर्व विदित है. बाबा कम से कम शुद्ध दवा आदि तो उपलब्‍ध करा करे है. एक बार उपयोग करके देख ले.
इसलिए किसी का मखोल उड़ाना आसान है. स्‍वयं उस पर अमल करना और बात है.

Satish said...

Yah sarasar galat hai ki babaji koi ladke paida karnewali dawai bechte ya banate hai, koi bhi patanjali chikitsalay me jakar dekh le Babaji ne Garbh ling Jananeka kada Virodh kiya hai Koi to Jan boozkar yah Bhram failana chahte hai Yog guru Ramdevji samaj ka Bhala hi to kar rahe hai, Jo Videshi vastuo ka bahishkar karne ko kahte hai Videshoke Dalalo Ab tumhe Bhagne ka Waqt Aaya hai Sudhro

ना काहू से दोस्‍ती, ना काहू से बैर

अपन को तो खबर से मतलब है. कहीं से भी आए, मगर उसमें गूदा होना चाहिए.